पढ़ने के शौकीन दिल थाम कर ध्यान दें !
लपक लें झटपट मौका हाथ से जाने न दें !
यह चीज़ है कमाल की आपके काम की !
हमेशा नहीं मिलतीं नैमतें अपने रूझान की !
पढ़ते-पढ़ते जब कोई काम आ जाए ..
लौटें तो पुस्तक का पन्ना खो जाए !
विद्यार्थियों की तो और बङी बलाएं !
किताबों के समंदर में डूबते ही जाएं !
आप सबके लिए है एक ही उपाय !
जो हिंदी में पुस्तक चिन्ह कहलाए ।
छोटे-बङे सजीले बुकमार्क आज़माएं !
मनभावन डिज़ाइन छांट कर ले जाएं !
दाम तो हुज़ूर इनके कुछ भी नहीं जी !
जितनी कारीगरी इनकी मन को लुभाए !
ख़ास बात ये कि छोटे बच्चों ने हैं बनाए !
बहुत कुछ कहती हैं इनकी कल्पनाएं ।
शादी के कार्ड जो रद्दी की शोभा बढाएं ।
कैलेंडर,लिफ़ाफ़े,चित्र, जो काम न आएं ।
बचे हुए रंग, कतरनें , सब काम में लाएं ।
होनहारों के रहते कुछ भी बेकार न जाए ।
डायरी, किताबों की, नूरानी रंगत हो जाए !
पढ़ते-पढ़ते कहाँ रूके थे, यह याद दिलाए ।
स्वाभिमानी बच्चों को स्वावलंबी बनाएं ।
कद्रदान मनपसंद चिन्ह खरीद ले जाएं ।
कान किताबों के उमेठने की नौबत न आए !
बुक काॅर्नर्स की टोपियाँ कोनों को पहनाएं !
सुलेख,सुविचार,फूल-पत्ती,मांडने से सजाएं,
इन्हें पढ़ने के सफ़र में मील का पत्थर बनाएं ।
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कलाकार :
माखनचोरी - उड़ीसा के अनाम कलाकार
अंग्रेज़ी बुकमार्क - वृंदा शांडिल्य
शेष दो अपने बनाए हुए
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