मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022

गुस्ताख़ी सूरज की



देखो तो ज़रा ढलते सूरज की गुस्ताख़ी !
आंसू बहते देखे तो ऐसी की बेअदबी !
धरती से आकाश तक करवा दी मुनादी !

ह्रदय में जिसके मायूसी, चेहरे पर उदासी, 
कुम्हलाये मुख पर जो बरबस लायेगा हंसी,
उसे मिलेगी खुशियों की करामाती पिटारी !

कहते ही सांझ ने तान दी चुनरी रंग-बिरंगी,
लाल, गुलाबी, हरी, पीली, बैंजनी, नारंगी !
मद्धम हुई फिर रोशनी नीलम से नभ की ।

एक-एक कर तारे चमके साथ चंद्रमा भी,
टिमटिमाते दियों से जैसे जगमगा उठी ज़मीं,
झिलमिल उजली मुस्कान नयनों में झलकी !

घर-घर हुई रोशनी मिटाती तम की पहरेदारी !
किसी को हंसाने से भी मिलती है तसल्ली बङी,
खोई हंसी मिलती है अपने आसपास ही कहीं ।

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

गुलाब बन के खिलो


गुलाब की तरह खिलो
भीनी-भीनी खुश्बू बनो
भावुक दिलों में बसो
किसने रोका है ?

खुशकिस्मती पर अपनी
खूब इतराओ !
अपना हुनर आज़माओ !
बेफ़िक्र मुस्कुराओ !
किसने टोका है ?

पर भूलना नहीं,
रंगों और खुश्बू का
है कांटों से,
साथ हमेशा से, 
चोली दामन का ।

गुलाब का इत्र बनो ।
गुलकंद बनो ! गुलफ़ाम बनो।
कद्रदानों के बीच रहो ।
कोमल हो।
काँटों के मध्य उगो ।
महफ़ूज़ रहो ।

पर शिकायत ना करो ।
काँटों से परहेज न करो । 
काँटों के बीचों-बीच 
सर उठा के जियो ।
काँटों को अपना कर जियो ।
खट कर, डट कर, टूट कर !
अड़ कर जियो !

जो होगा सो देखा जायेगा !
जब बीतेगा तब झेला जायेगा !
मुरझाने से पहले तक.. 
गुलाब हो, गुलाब की तरह जियो !
ठाठ से खिलो !
किसने रोका है ? 



बुधवार, 19 जनवरी 2022

जिद्दी है ज़िंदगी



राह बहुत लंबी 
बाकी है अभी.
कोई बात नहीं.

कट जायेगा ये भी.
वक़्त बुरा ही सही.
एक दिन बदलेगा ही.

कभी धूप होगी.
कभी छाँव भी.
कभी घटा बरसेगी.
पवन चुभेगी तीर सी.

कभी बात निकलेगी 
बीते दिनों की.
कभी फ़िक्र होगी 
आने वाले कल की.

कभी होगी दोस्ती 
कुछ देकर जाएगी.
कभी यारी टूटेगी भी 
कुछ सिखा कर जाएगी.

ठोकर भी लगेगी 
पर संभल जाएगी.
जिद्दी है ज़िंदगी 
रास्ते ख़ुद बनाएगी.