आज एक बङा-सा लाल गुलाब खिला
सजीले गुलाब की रंगत का क्या कहना
प्रभात का सूरज पहने नारंगी झबला
एक-एक पंखुरी का हौले से खिलना
उदय होते बाल सूर्य की स्वर्णिम आभा
खिलते फूल पर ओस की बूँद का ठहरना
कच्ची धूप के स्पर्श से इन्द्रधनुष बन जाना
जीवन के स्पंदन का मधुर राग बन जाना