रविवार, 16 जनवरी 2022

जीवन का स्पंदन



आज एक बङा-सा लाल गुलाब खिला
सजीले गुलाब की रंगत का क्या कहना 
प्रभात का सूरज पहने नारंगी झबला 
एक-एक पंखुरी का हौले से खिलना

उदय होते बाल सूर्य की स्वर्णिम आभा 
खिलते फूल पर ओस की बूँद का ठहरना 
कच्ची धूप के स्पर्श से इन्द्रधनुष बन जाना 
जीवन के स्पंदन का मधुर राग बन जाना 


शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

समय का अल्पविराम


हो रहा है इस बरस का
अंतिम सूर्यास्त ।
कह रहा है अलविदा 
ढलते हुए आज । 

वक्त रहते कह डालो
जी में अटकी बात ।
समय बीतने से पहले 
सुलझा लो उलझे याम ।

सांझ का पट ढल रहा
सजा रंगों के साज़ ।
क्षितिज सुर साधता
जपता सहस्रनाम ।

यायावर है फिर चल देगा
समय का अल्पविराम ।
कभी तुम्हारे कभी हमारे 
राम संवारें सबके काम ।





मंगलवार, 7 दिसंबर 2021

पन्ना पलटने से पहले


पन्ना पलटने से पहले
एक बार बस
पीछे पलट कर देखना ।
कुछ पल
एकांत में पढ़ना,
लिखा प्रारब्ध का ।

क्या पीछे छूट गया,
क्या छोङ देना चाहिए ।
छोङ देना चाहिए
अफ़सोस और ग्लानि ।
ये आंसुओं से गीली
लकङियां हैं,
इनसे पछतावे का
धुआँ निकलता है बस,
चूल्हा नहीं जलता ।

पर करते-करते अभ्यास
जब-जब जले हाथ,
करना नहीं प्रलाप ।
अनुभव से सीख लेना
और निरंतर करना प्रयास ।
पन्ना पलट देना तत्पश्चात ।

खोल कर एक नया पन्ना
फिर से करना शुरूआत ।