शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

सही दिशा

उठो अब जागो !
दरवाज़ा कोई
खटखटा रहा,
आतुर है तुम्हें 
बुलाने को,
साथ ले जाने को ।

बाहर निकलो ।
देखो दुनिया की 
रौनक, चहल-पहल ।
काम पर सब के सब 
निकल पङे हैं ।

तुम क्यों हताश हो ?
जीवन से क्यों निराश हो ?
भागदौड़ आपाधापी से 
निरर्थक व्यस्तता से त्रस्त हो ?

चले जा रहे हैं सारे बेतहाशा 
पर इन सभी ने क्या 
मार्ग सही चुना था ?
इस अथक परिश्रम से क्या 
भला किसी का हुआ था ?

अच्छा तो ये है जटिल समस्या!
तुम्हारा चिंतन ही बन गया 
तुम्हारे कर्म पथ की बाधा !

सुनो सोचते रहने से भी क्या होगा ?
घर की बिजली का बिल ही बढेगा !
करवट बदल-बदल कर बिस्तर पर
ना किसी बिल का भुगतान होगा,
ना ही किसी का कल्याण होगा !

कुछ ना करने से और तार उलझेगा ।
दम तोङेंगे सुर, राग बिखर जाएगा ।
कुछ करने से ही जीवन क्रम सुधरेगा ।
जो ग़लत राह चुनते हैं, उन्हें जाने दो ।
तुम अपने जीवन को तो सही दिशा दो ।

बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

सूर्यास्त के बाद

शाम ढले देखा,
सामने की छत पर 
पहने नारंगी जामा
टहल रहा था सूरज,
अब तक ढला न था ।

असमंजस में था ।
मन में सोच रहा था
आज अगर छत पर
सो जाऊं मैं चुपचाप ?
देखूँ कैसे दिखते हैं तारे 
दूर गगन में झिलमिलाते ।
कैसा लगता है चंद्रमा ?
नभ के भाल पर चमकता ।
और चांदनी का उजियारा ।

इतने में कोई वहां रख गया
इक लालटेन और बस्ता ।
जला कर पढ़ने लगा बच्चा ।
सूरज फिर सोच में पङ गया ।

सूर्यास्त के पश्चात जगत सारा
करता है विश्राम थका-हारा ।
अथवा निपटाता बाकी के काम,
मन में लिए भोर होने की आशा ।
सबके जिम्मे अपना-अपना काम ।
बोरिया-बिस्तर अपना बांध तत्काल 
करना होगा मुझे अविलंब प्रयाण ।
समस्त सृष्टि को है जिसकी प्रतीक्षा 
समय पर वह सूर्योदय अवश्य होगा ।

मंगलवार, 26 जनवरी 2021

जन गण मन प्रतिबद्ध

जन्मभूमि के लिए 
जो जिये और मरे,
उनका अनुकरण 
कर पाएं हम ..
साहस का उनके 
कर वरण,
नित करें स्मरण 
और वंदन ।

शहीदों और वीरों के
बलिदान का हर क्षण,
अमिट छाप छोङे
जन मानस पर ।

जो न्योछावर हुए 
देश की माटी पर,
उन पर न्योछावर 
देश की धङकन ।

श्वास श्वास कृतज्ञ
शत शत नमन,
सदा सेवा में सजग
सज्ज रहें जन गण मन ।