बन गया आसमान !
धूप का दुशाला लपेट
सूरज उचक कर
रुई के बादल पर
जा बैठा खुश हो कर
देखने बच्चों का खेल !
पतंगों भरा आसमान ..
लो मच गया घमासान !
हवा ने बजाई विसल !
दौड़ने लगे बच्चे सब !
धूप में चमकते उनके स्वेटर
नीला, पीला, हरा, लाल ..
गुलाबी स्वेटर पर जामुनी फूल,
शक्कर पारे से बने किसी पर,
किसी का स्वेटर पट्टीदार,
किसी का स्वेटर बूटीदार !
भूरे स्वेटर पर बनी रेल !
धानी स्वेटर पर फूलों की बेल !
एक से एक चटक सबके स्वेटर !
इधर रेवड़ी बंट रही छत पर !
चमकीले ऊन सी मांझे की डोर !
चरखी संभाले मुन्नी कर रही शोर !
वो देखो दो चोटी वाली पतंग !
लम्बी जटा खोले नाचे मलंग !
चाहिए मुझे चंदोबे वाली पतंग !
दिन ढलने से पहले काटो पतंग !
सुन कर सरपट भागी काली पतंग !
उसके संग हो ली लहरिया पतंग !
पहले दी ढील फिर लिया लपेट !
चौकस नारंगी ने किया चेकमेट !
वो काटा ! चिल्ला कर उछल पड़े सब !
ध्यान हटा ! नारंगी भी झट गई कट !
खुले आसमान में बच्चों का खेल।
खेलना, झगड़ना, फिर पल भर में मेल।
बच्चों की उमंग , उड़े जैसे पतंग !
पतंगें भी कभी करें, बच्चों-सा ऊधम !
अजी ! काटो पतंग या कट जाए पतंग !
मिलजुल कर मौज करो सबके संग !
तिल के लड्डू और गुड़ की गजक,
मुँह करो मीठा और बोलो मीठे बोल !


