शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

पुलक


बीज बोने के
बहुत दिनों बाद तक
सींचते-सींचते
मिट्टी को नरम रखते
आतुर नयन
ढूँढते हैं
जीवन का कोई चिन्ह ।
और तब
जब एक दिन अचानक
नम मिट्टी में
एक अंकुर
फूटते देख
जो पुलक हृदय में
हिलोर लेती है ..
उल्लास का सरोवर
बन जाती है ।
उस सरोवर को कभी
सूखने मत देना ।
उस निर्द्वंद पुलक को
भाव सरोवर में,
अनगिनत कमल बन
खिलने देना ।


रविवार, 21 जुलाई 2019

भक्ति की आभा




नीलाम्बर सा
नभ का चंदोबा,
पतंगों सी झिलमिलातीं
पताकाएं बावरी झूमती,
पीताम्बर सी फहरातीं ..
कीर्तन करती हुई
आनंद उत्सव मनातीं  
वंदना की वंदनवार। 
ह्रदय को आभास करातीं
भक्ति की आभा का ।

कोई तान हृदय से उठती
जुगल जोड़ी के चरणों में
शीश नवाती अश्रु बहाती
हो समर्पित लौ लगाती ..

दीजिये सन्मति शक्ति
धर्म पथ पर दृढ़ रहने की,
सजग आराधना की ..
और दीजिये भक्ति की
अनमोल थाती,
चरणारविन्द में शरण
पग में धारित शरणागत 
नूपुर समान ।

गुरुवार, 18 जुलाई 2019

नानाजी ने दी थी


नानाजी ने दी थी
नारायण की चवन्नी ।

कहा था,
संभाल कर रखना
इसे कभी मत खोना ।

ये भी कहा था,
जब सब खो जाता है,
तब काम आती है
नारायण की चवन्नी ।

बात सच्ची निकली ।
जब किस्मत खोटी निकली
तब चवन्नी ही काम आई ..

नारायण की चवन्नी 

क्या नहीं खरीद सकती ?
चांदी-सोने की गिन्नी ?
पर मन का चैन देती
नारायण की चवन्नी ।

इस चवन्नी के बल पर
हम दुनिया से लड़ गए 

बहुत हारे, पर हारे नहीं 

हमारी मुट्ठी में जो थी,
नारायण की चवन्नी ।

अमीरी का हमारी 

ठिकाना नहीं !
ठाकुरजी के दिए 

ठाठ हैं सभी !
प्रारब्ध की कील 

गड़ती नहीं ।
विरासत में हमको

सेवा मिली ।

रसास्वादन की 
कला दी थी ..
रस में पगी 
कथा दी थी ..

नानाजी ने दी थी
नारायण की चवन्नी ।