रविवार, 7 जुलाई 2019

जलमय सजल मन




जो पूछना नहीं भूलते
कैसे हैं आपके पौधे ..
उन्हें पता है
आपकी जान बसती है
अपने पौधों में,
जैसे कहानियों में
अक्सर राजा की
जान बसती थी
हरे तोते में ।

उन्हें आभास है
जीवन की
क्षणभंगुरता का ।
इसलिए जी उनका
उत्साह से छलकता
स्वच्छ ताल गहरा..
जिसमें खिलते
अनुभूति के कमल ।
जल में सजल
जीवन का प्रति पल ।


सोमवार, 27 मई 2019

जिजीविषा और दुआ



आज 
यह फूल खिला
उस पौधे पर,
जिस पौधे की
लगभग इति
हो चुकी थी ।

पर जब
किसी ने कहा,
चमत्कारी
होती है आशा..
और सेवा,
उस भरोसे ने
पौधा फेंकने
नहीं दिया ।

दिन-रात बस
मन में मनाया
जी जाए पौधा ।

मिट्टी खाद धूप जल
और देखभाल ने
पौधे में रोप दी
जिजीविषा ।

आशा ने
औषधि का
काम कर दिखाया ।

आज सुबह देखा
ऐसा फूल खिला !
मानो किसी ने
मांगी हो दुआ ।