Monday, 27 May 2019

जिजीविषा और दुआ



आज 
यह फूल खिला
उस पौधे पर,
जिस पौधे की
लगभग इति
हो चुकी थी ।

पर जब
किसी ने कहा,
चमत्कारी
होती है आशा..
और सेवा,
उस भरोसे ने
पौधा फेंकने
नहीं दिया ।

दिन-रात बस
मन में मनाया
जी जाए पौधा ।

मिट्टी खाद धूप जल
और देखभाल ने
पौधे में रोप दी
जिजीविषा ।

आशा ने
औषधि का
काम कर दिखाया ।

आज सुबह देखा
ऐसा फूल खिला !
मानो किसी ने
मांगी हो दुआ ।

15 comments:

  1. As acharyaji kehte hain, ki sewa pe duniya tiki hui hai. A very important part of sewa is faith. So faith and service bloomed this beautiful flower!

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    1. सेवा से सजग संसार सहज और सुन्दर होता है.
      अनमोल सा सेवा का सुख इन फूलों के खिलने में पाया.
      आचार्यजी जो समझाते हैं, हम जीवन में उतार पाएं ..
      तो चंहु ओर फूलों को खिला पाएं.

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (29-05-2019) को "बन्दनवार सजाना होगा" (चर्चा अंक- 3350) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्रीजी.
      बड़ी सुन्दर वंदनवार ड्योढ़ी पर सजी है !

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  3. अप्रतिम।
    बहुत बहुत सुंदर।

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  4. बहुत सुंदर रचना

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    1. हार्दिक आभार अनुराधाजी.

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  5. आशा ने
    औषधि का
    काम कर दिखाया ।

    आज सुबह देखा
    ऐसा फूल खिला !
    मानो किसी ने
    मांगी हो दुआ
    बहुत सुंदर......

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  6. शुक्रिया कामिनी जी.
    उम्मीद पे दुनिया कायम है !
    ये किसी की दुआ का असर है !

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  7. आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 1 जून 2019 को साझा की गई है......... "साप्ताहिक मुखरित मौन" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  9. प्राक्रितिक सुंदरता से सराबोर ,कोमल एहसास वाली सुंदर रचना ।

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  10. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

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  11. As the admin of this web page is working, no doubt very soon it will be famous, due to its
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