रविवार, 8 नवंबर 2026

ज्योतिर्मय दीप


दिल की तंग गलियों में भी

जो ठान कर रास्ता बनाता है,

वो ज़िद्दी दिया कहलाता है ।


घुप्प अंधेरे में

जहाँ न सूरज की किरण

न खुली हवा का दुलार

सोच के बंद किवाङों की 

टूटी-फूटी ड्योढ़ी पर 

जलते दिये का आलोक

संधों से झाँक-झाँक,

अंधेरे के पाश में भी

रोशनी की तलब उपजाता है ।


निर्जन सूने मन के पथ पर

कोई लालटेन लिए आता है,

निर्धन के उदास मांडने पर रखा

आस का दीपक टिमटिमाता है ।


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