दिल की तंग गलियों में भी
जो ठान कर रास्ता बनाता है,
वो ज़िद्दी दिया कहलाता है ।
घुप्प अंधेरे में
जहाँ न सूरज की किरण
न खुली हवा का दुलार
सोच के बंद किवाङों की
टूटी-फूटी ड्योढ़ी पर
जलते दिये का आलोक
संधों से झाँक-झाँक,
अंधेरे के पाश में भी
रोशनी की तलब उपजाता है ।
निर्जन सूने मन के पथ पर
कोई लालटेन लिए आता है,
निर्धन के उदास मांडने पर रखा
आस का दीपक टिमटिमाता है ।
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