शनिवार, 15 अगस्त 2026

राखी भेजना भूल न जाना


बहना तीज का सिंधारा तुम्हारा

आज किसी के हाथ है भिजवाया ।

घेवर,मेंहदी,टिकुली,पायल,चूङी,

बोरला और लहरिया साङी धानी,

झुमके छल्लों वाले जो तुम्हें भाते ।

कुछ पौधों के बीज हैं तेरी पसंद के।

बारिश में भीगी अभी नरम है मिट्टी,

अपना लेगी बीज,अभी जो बो दोगी।

वर्षा की बूँदों से सजी हुई है धरती,

काजल से काले बादल घिरें कभी,

घुल-घुल बरखा की लग जाए झङी।

स्मृतियों के मयूर तब पंख फैलाएंगे,

छम-छम करते मेघ मल्हार गाएंगे।

पानी के बुलबुले, बचपन की यादें,

काग़ज़ की नाव जल में तैराएंगे !

झोके दे देकर झूला तुम्हें झुलाऐंगे

गीत पुराने आँखें नम कर जाएंगे ।


काम-काज में लेकिन भूल न जाना

राखी भैया-भाभी को भिजवाना ।

बहन ही नहीं भाई को भी रहती आस

आते-जाते डाकिये पर रहता ध्यान ..

एक लिफ़ाफ़े में राखी, रोली‐अक्षत

साथ रखी चित्रकारी वाली चिट्ठी !

अधिक नहीं दो-चार बातों वाली,

बस हाल-चाल गपशप बेमतलब की ।

लिखावट तुम्हारी बाकी सब कह देती ।

सूत भर का ही तो है भाई-बहन का नाता

राखी के धागों में पिरोया सूत्र रक्षा का ।



7 टिप्‍पणियां:

  1. बचपन की सोंधी यादें आजीवन मौका -बेमौका चुपके से छू जाती हैं। बेहद भावपूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १८ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. बहुत खूब !
    रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएँ

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  3. रक्षाबंधन के पर्व पर बचपन याद आ ही जाता है, सुंदर सृजन

    जवाब देंहटाएं

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