वो एक जोङी नयनविशाल वर्तुलाकारउनका पावन सम्मोहनपारदर्शी नदी का जलशीतल हुआ ह्रदयतलस्निग्ध चंदन का लेपनवो एक जोङी नयन..वो एक जोङी नयनपट की ओट से गोपनअपलक अवलोकन ।दीपज्योति मध्यम,धूमिल होता अंतर ।सर्वस्व हर लेते तत्क्षणवो एक जोङी नयन ।वो एक जोङी नयनसमाया जिनमें संसारअथाह करुणा अपार ।अश्रु जल बिंदु साकारघुल गया मानो काजलसुदर्शन विस्तार सजलवो एक जोङी नयन ।श्याम भ्रमर विद्यमानगुंजायमान नाद ओंकार ।रथ चक्र की धुरी समानपुतली तुम्हारी घनश्याम ।डिठौना जगत आनन परदैदीप्यमान हे जगन्नाथ !वो एक जोङी नयन ।
बुधवार, 17 जून 2026
वो एक जोङी नयन
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कान्हा की करुणा का कोई अंत नहीं, भक्तिभाव से पूर्ण सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 18 जून, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंभक्तिरस से ओतप्रोत भाव पूर्ण सृजन ।
जवाब देंहटाएंडिठौना जगत आनन पर
दैदीप्यमान हे जगन्नाथ !
वो एक जोङी नयन ।
अति सुन्दर 🙏
आहा! गोल नयनों में समायी गोल दुनिया, और सीधी सुंदर कविता! बहुत प्यारी।
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंपट की ओट से गोपन
जवाब देंहटाएंअपलक अवलोकन ।
वाह!!!
वो एक जोङी नयन अति मनमोहन
बहुत ही सुन्दर भक्ति भावमय लाजवाब सृजन ।