बुधवार, 25 मार्च 2026

सजल यमुना जल


यमुना के इसी पाट पर

कालिन्दी के इसी घाट पर

कन्हैया ने की थी लीला,

यहीं शीश नवाते हैं हम 

लीला स्मरण कर अब तक ।

यमुना की लहरों पर लिखा

अब भी साकार लीला सार ।


कालिया नाग को नाथा था

और विष मुक्त किया था

यमुना जल नटवर नागर ने ।

मुग्ध होकर हमने सुना वर्णन

पर स्वयं क्यों न देख सके दर्पण ?


जिस यमुना की स्तुति की हमने

बङे चाव से की चढाई चुनरिया,

उसी यमुना मैया को किया मैला !

नदी को बना दिया एक नाला ?


आरती की 'उज्ज्वल तट रेणु की' ?

पथरा गया मार्ग परिक्रमा का ।

चिन गया तट श्री यमुना का ।

मिट गया प्राचीन वृक्षों का पता ।


'बज रही मुरली मधुर वेणु' कहाँ ?

हर तरफ़ भीङ, धक्का-मुक्का,

खोमचे,दुकानें,लाउडस्पीकर घनघोर !


किसने मोर मुकुट वाले को पुकारा ?

क्या हमने यमुना मैया से ही पूछा ?

'कालिन्दी कूल' क्या अब भी आता

रास रचाने, गाय चराने नंदलाला ?


जिस दिन हम चेतेंगे समझेंगे पीङा,

सर्वप्रथम साफ़ करेंगे यमुना मैया ।

नौका लीला करने फिर से आएगा,

मुरली बजैया,रास रचैया कन्हैया ।

चरण पखारेगी जिनके यमुना मैया ।

 

7 टिप्‍पणियां:

  1. कब आएगी वह घड़ी, कान्हा यही तो पूछता है

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 29 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. जो आपका दर्द है, वही कान्हा को याद करने वाले और यमुना से लगाव रखने वाले हर इंसान का दर्द है।

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  4. सामयिक प्रश्न उठाया है आपने नूपुर जी। काश सभी in भावों को आत्मसात करके उचित कदम उठाएं।

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