नदिया का जल बहता कल-कल
नयनों से अश्रु प्रवाहित अविरल
सूर्य को अर्पित अर्घ्य अंजुरी भर
वर्षा ऋतु में जल बरसे लगातार ।
जल ही है तरल भाव जीवन का
मिट्टी और ह्रदय को सींचता जल
गीली मिट्टी में अंकुरित होता बीज
ज़ख्मों पर मरहम जैसी नज़रें नम ।
सागर,नदी,तालाब, झील,सरोवर,
बरसात के पोखर, कुँए का जल,
ऋतुचक्र सदा संचित करता जल
हर बूँद में झिलमिलाता इंद्रधनुष !
अपार है सभी जलाशयों का बल,
पहाङ काट के राह बना लेता जल,
बाधित नहीं, दूषित नहीं करें जल
दो पाटों के मध्य समाधान सकल ।
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