शनिवार, 21 मार्च 2026

खुशी मिली


छत पर सूखते कपङे

आङे-तिरछे कोण धूप के

रसोई में पकती दाल

पेट भर तरकारी अनाज ,


नयन भर खुला आकाश

खिङकी तक आती डाल

डाल पर खिला पीला फूल

झूला झूलती गौरैया मगन,


स्कूल के बस्ते में किताब

खेलते-कूदते बढते बच्चे

नलों में पानी सुबह-शाम 

बस-ट्रेन,रिक्शे की सवारी,


रात भर की गहरी नींद

रेडियो पर समाचार,गीत

हँसते-बोलते गाते रिश्ते

आते-जाते सलाम-नमस्ते ,


ज़िन्दगी इतना सब जीते हुए 

जाने कब सर्राटे से बीत गई ।

ढूँढने की फ़ुरसत ही नहीं मिली

जिसे कहते हैं लोग सारे खुशी !


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