मौन एक भाषा है
समस्त सृष्टि के मध्य
सहज संवाद की ।
सूर्योदय मौन ,
चंद्रोदय मौन ..
दिवस रात्रि मौन..
फूलों का खिलना मौन ।
शब्द मौन..संवेदना मौन ।
मन जुङने की पुलक मौन ।
मौन भीगे नयनों की भाषा ।
मौन ह्वदय की अभिलाषा ।
मौन रह कर सुना जाता है,
जो रह गया था अनसुना ।
मौन बुनता है शब्दलोक
मौन रचता है बूँद-बूँद संगीत ।
मौन करता है सृजन।
विवेचना जीवन की ।
मौन गढ़ता है स्मृति ।
मौन सुनाता है इतिहास ।
मौन लिखता है किताब ।
सोख लेता अश्रु का सैलाब ।
मौन बदलता है दृष्टिकोण।
देखने देता है दूसरा पक्ष ।
यज्ञ की समिधा है मौन ।
मौन गहरे पैठ पा जाता है मर्म।
मौन है गहरे कूप का जल ।
मन प्रांत कर देता शीतल ।
मौन का आकाश है स्वतंत्र।
मौन की व्याख्या है मौन ।
मौन आत्म विश्लेषण
दिखाता है दर्पण ..
मौन जगाता शक्ति,
दृढ़ करता मनोबल,
सुलझाता उलझे तार ।
बहुधा मौन बन कर खेवैया
किनारे लगा देता है नैया ।
मौन जगाता शक्ति
जवाब देंहटाएंयकीनन
सुंदर
जवाब देंहटाएंजिसके समस्त संपूर्ण कोलाहल मोक्ष पा जाए,वही मौन है।
जवाब देंहटाएंबेहद सुंदर, मौन के विराट रूप को
शब्दांकित करती गहन भाव लिए सार्थक रचना।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना सोमवार १३ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।