शुक्रवार, 19 मई 2023

किसने मन का फूल खिलाया

अब जाकर समझ में आया
किस बात ने फूल खिलाया
बाट जोहती थीं जो कलियाँ 
डालों पर अब तक गुमसुम 
आज हठात उन्हें हुआ क्या
किसने उन पर जादू चलाया
जाने क्या उनके मन में आया 
झोंका पवन का संदेसा लाया
कलियों का भी मन हरषाया
प्यार प्रार्थना साथ किसी का
बन गए ज़िदगी का सरमाया
बूँद बूँद चिंतन मिट्टी ने सोखा
भाव भूमि पर फूल खिलाया


7 टिप्‍पणियां:

  1. आप ने लिखा.....
    हमने पड़ा.....
    इसे सभी पड़े......
    इस लिये आप की रचना......
    दिनांक 21/05/2023 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की जा रही है.....
    इस प्रस्तुति में.....
    आप भी सादर आमंत्रित है......


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    1. सादर धन्यवाद, कुलदीप जी. इस अवसर के लिए. आज के अंक में अद्वितीय भूमिका और रचनाएँ पढ़ने को मिलीं.

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  2. वाह, जब कवि और प्रकृति का संगम हो, तो इस सुन्दर पंक्ति के लिए शब्द ही नहीं हैं

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    1. वाह सचिन ! कविता कहने लगे हो क्या !
      शब्दों का क्या कहना ! काव्य और प्रकृति सहजता के ही दो नाम हैं. तुमने पढ़ा. बहुत अच्छा लगा. शुक्रिया !

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  3. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 22 मई 2023 को साझा की गयी है
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. प्यार प्रार्थना साथ किसी का
    बन गए ज़िदगी का सरमाया
    प्यार प्रार्थना और साथ जो मिल जायें तो जीवन कुसुमित हो ही जाता है ।
    लाजवाब सृजन ।

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