Sunday, 16 June 2013

कैसे कहोगे ?




कैसे कहोगे ?
कि उससे प्यार है तुम्हें ..
चाँद उतार कर 
उसकी हथेली पर 
रख दो .
या इन्द्रधनुष का ताज 
उसके सर पर 
रख दो .
सितारों के झुमके 
पहना दो .
आसमान को ज़रा-सा 
झुका दो .
हाथ की लकीरों में  
पढ़वा दो .
बिना कहे 
सब कुछ बता दो .

तुम्हें पता है क्या ?
दिल से दिल तक एक 
ख़ुफ़िया रास्ता होता है ,
जिसका पता सिर्फ़  
दिल को होता है .
कहने की भी ज़रुरत है क्या ?
धड़कनों का अफ़साना 
ख़ुद-ब-ख़ुद बयाँ होता है .


 

4 comments:

  1. ओहो! प्यार मुहब्बत की बातें.... हम क्या समझें भला!!! क्या जानें, कि कैसे कहेंगे। सो, अच्छा लगा कि आप ने कहा कि कहने की ज़रूरत ही क्या है। दिल से दिल का 'खुफ़िया' रास्ता होता है... में यह खुफ़िया शब्द का प्रयोग बहुत पसंद आया। सच है, यह वह जज़्बा है जो ख़ुद ही ब्याँ होता है। जज़्बात को ज़बान की ज़रूरत नहीं। ख़्याल कोई नया नहीं है। मगर जैसा कि अक्सर आप के साथ होता है (या यूं कहें कि साल भर पहले की कविताओं में ज़्यादा होता था), कि बात को इस तरह कहा गया है कि थोड़ा लड़कपन, या सच कहें तो अनाड़ीपन झलकता है जो बात को एक मासूम सा 'टच' दे देता है। दिल तो अभी बच्चा ही है वाली बात आ जाती है। कुछ भी हो, कविता अच्छी लगी। शीर्षक सटीक है जो कविता को अर्थ देने में पूरी तरह कामयाब है। बधाई हो। खुश रहें। लिखती रहें॥

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  2. aap ki kahi baat 21 june ko ashirwad ki tarah hamen mili.21 june hamare appa ka janmdin hua karta tha..tahe-dil se shukriya.pranam.

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  3. प्रणाम। ख़ुश रहें। मुझे भी नहीं पता कि मैं यहाँ 21 जून को कैसे आया। इस समय तो मुझे यात्रा में होना था। सारे कार्यक्रम ऐसे गड़बड़ हुये कि टिकट तक वापस नहीं हो सके। और 21 को मैं यहाँ आप की कविता पढ़ रहा था।
    अप्पा आप किसे कहती हैं, मैं नहीं जानता; मगर वह जो भी हों, उनका जन्मदिन हुआ करता 'था' नहीं, हुआ करता 'है'। हमारे बड़े अपने आशीर्वाद के रूप में हमेशा हमारे साथ होते हैं। वह कभी भी हमें छोड़ कर नहीं जाते। हमें उनके लिये हमेशा दुआ करनी चाहिये।

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  4. appa yani hamare pitaji. dhai saal pehle chale gaye. apki baat ham jeevan bhar nahi bhoolenge.aap unhe jaante nahin phir bhi ye baat kahi jo man par chhap gayi hai.

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नमस्ते