Sunday, 10 August 2014

इसी रास्ते पर




जब मन दुखी था . . 
इसी रास्ते पर,
चलते-चलते 
मैंने देखा - 
घूरे का ढेर ,
ऑटो स्टैंड के कोने पर 
बिल्डिंग भदरंग ,
टूटी कम्पाउंड वॉल ,
मारुति मैदान की सूखी घास ,
भाले सी चुभती धूप ,
कार की छत पर 
चिड़िया की बीट ,
बेमानी भीड़। 

जब मन प्रसन्न था  . . 
इसी रास्ते पर 
चलते-चलते 
मैंने देखा -
फूलों से लदा सोनमोहर। 
सोनमोहर के नीचे, 
फूलों की चादर से ढकी 
चाय की टपरी ,
लाइन से खड़ी 
कारों की छत पर 
इन्ही फूलों की मेंहदी। 
वटवृक्ष की घनी छाँव। 
रास्ते के अगले छोर पर 
बहुत पुराना राम मंदिर। 
मंदिर की घंटियों के 
सुरीले स्वर। 
स्कूल से आता बच्चों का शोर। 
चमचमाती दुकानें ,
घरों से झाँकते दिलचस्प  चेहरे, 
कर्मठ इंसानों के आते-जाते रेले, 
नुक्कड़ पर चाट के खोमचे, 
साँझ-सवेरे जैसे लगते हों मेले। 

देखा जाये तो आश्चर्यजनक सत्य यही है ,
वास्तव में, 
दुखी मन से 
प्रसन्न मन का 
पलड़ा भारी है।        
       



3 comments:

Om Parkash sharma said...

मन की अवस्था बदल देती है प्राय: हमारी दृष्टि| सभी परिस्थितियाँ एक रहने पर भी मानसिक स्थिति के अनुसार अकसर बदल जाता है देखने का दृष्टिकोण और उसका प्रभाव| भले ही हमारे दुखी मन पर सुखी मन का हो पलड़ा अधिक भारी लेकिन किसी के हृदय में इसके विपरीत भी हो सकता है|

noopuram said...

धन्यवाद शर्माजी ।

मन के जीते जीत है, मन के हारे हार ।

Shams Noor Farooqi said...

कूड़े का ढेर और टूटी दीवार और सूखी घास और चिड़िया की बीट भी देख ली!!! क्या क्या देखती रहती है यह लड़की दुखी मन से। और जब मन प्रसन्न हुआ तो चाय और चाट के ठेले दिखने लगे। लोगों के घर में भी झांक लिया। सही जा रही हो बिटिया।

हा हा। मज़ाक़ कर रहा हूँ। कविता पढ़ कर दिल जो ख़ुश हो गया, सो मज़ाक़ सूझ रहा है। विषय अच्छा है, इसमें कोई सन्देह नहीं, हम सब के मन की अंतर्भावना है। अभिवयक्ति उत्तम है। यही तो तेरी विशेषता है रे बिट्टो। रोज़मर्रा के जीवन से छोटी छोटी बातें निकाल लाती है, जो यूं तो अर्थहीन लगती हैं मगर अर्थ पाकर बहुत बड़ी हो जाती हैं।

एक और बात जो अभी पिछली कविता – अनुभव – में कर रहा था। कितना भी घना अंधेरा हो, प्रकाश की एक किरण उसे चीर देती है। प्रकाश अंधकार पर, सुख दुःख पर हमेशा भारी है। यही परम सत्य है।

मगर यह भी सदा के लिये जान ले बिटिया, की अगर दुःख न हो, तो सुख का आनन्द क्या? यदि अंधकार न जाना, तो प्रकाश का महत्व कैसा? जान ले कि जो हमारे जीवन का प्रकाश है, उसका नाम ही कृष्ण है। जब श्याम होगा, तो ही प्रकाश होगा। यह समझ लेगी, तो जीवन में कभी दुःख न होगा। ख़ुश रह। लिखती रह।

नमस्ते

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