शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

एक चिरैया गौरैया










हमने सुनाई जब आपबीती 
गौरैया की महिमा बखानी
तब एक नौजवान ने ठानी
नन्ही चिरैया से बतियाने की

मुक्त कंठ से हमने प्रशंसा की 
नवयुवक के सहज उत्साह की
बात 'गल्प करिबो' बिरादरी की
गोष्ठी में सदस्यता बढ़ाने की थी

बात करने से सुलझती है गुत्थी
बात करने से खुलती है मनोग्रंथी
जो बात समझ नहीं पाता आदमी 
चिरैया समझ जाती बिना कहे भी 

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

मुखर हो हास


 नव संवत्सर 
 हों स्वर मुखर 
 आशा के
 प्रार्थना के
 साहस के
 सद्भाव के ।

 श्रम के 
 फूल खिलें
 स्वेद बिंदु बन
 भाल पर ।
 
 कर्मठ तन-मन
 दामिनी सम 
 ललकारें ..
 देह की अस्वस्थता,
 अंतरद्वंद,
 मन के कलुष को ।
 
 खुरदुरे हाथों में 
 मुट्ठी भर मिट्टी,
 मेहनत से सींची जो,
 लो ! हथेलियों पर
 फूली सरसों ।
 
 स्वर मुखर हों ।
 घर-घर मंगल हो ।
 आनंद सुगंध हो ।
 धूप-सा हास हो,
 कुम्हलाए मुख पर ।

जीवन का संबल हो
आत्मबल का शंखनाद ।
 
 

शनिवार, 26 मार्च 2022

Why ?


Great men 
Wage wars.
Ordinary people 
Pay the price,
Without understanding 
Why ?

A man 
who has played music
On the streets of Ukraine
For years ,
Looks bewildered and asks,
What's happening ?

No one has the answer.
The man looks around
Then plays on ..the music.

It was in the news.
I looked for it later
To listen again.

But I guess 
Commonplace comments 
That do not become viral
Just disappear.
Why ?