नमक का दारोगा ?
अजी ऐसे किरदार,
जो अपने ईमान पर
चट्टान की तरह
अडिग रहते हैं,
वो असल ज़िंदगी में
कहाँ होते हैं ?
इतना कह कर हम
छुटकारा पा लेते हैं।
असल ज़िन्दगी में भी
नमक के दारोगा होते ,
अगर हम दूसरों से नहीं
ख़ुद से उम्मीद रखते।
यदि हम सचमुच चाहते,
तो दूसरों में नहीं ढूंढते ..
अपने भीतर ही खोजते
नमक का दारोगा।
ईमानदार किताबों में,
तो हम असल जिंदगी का
उन्हें हिस्सा क्यों नहीं बनाते ?
क्यों नहीं बन कर दिखाते वैसा
जैसा था नमक का दारोगा।


