फसल कटी है !
खुशी की घङी है !
बहुत दिनों बाद
भूले सुर आए याद !
धन-धान्य से
भरें भंडार !
खाने को मिले
पेट भर ।
आज है त्यौहार ।
कल फिर आएगा
बीज बोने किसान ।
शुरु होगा काम ।
अन्न ब्रह्म देवता
रहें श्रम से प्रसन्न ।
वरद हस्त हो
कला साहित्य पर ।
मिट्टी से जुङे रहें ।
फूलों की तरह खिलें ।
अपनों का साथ रहे ।
जो भी हो, खुश रहें ।
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
नूतन वर्ष फले-फूले
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
झूमर तले
दिन जैसे जैसे खूब तपने लगेफूलों के रंग चटख होने लगेझूमर से झूमते अमलतास फूलेरास्तों के किनारे सोनमोहर बिछेछज्जे-छज्जे पर बोगनवेलिया लगेमजाल है कि कोई भी रंग छूट जाएहर मील के पत्थर पर प्याऊ बनेमिट्टी के घङे का शीतल जल मिलेरास्तों को घने वृक्षों का साया मिलेराहगीर को चलने का हौसला मिले
बुधवार, 8 अप्रैल 2026
अपने कर्म ही
अपने कर्म हीभाग्य सँवारते हैं ।अपने कर्म हीआङे आते हैं ।अपने कर्म हीदाँव लगाते हैं ।अपने कर्म हीखूब पछाङते हैं ।अपने कर्म हीपहचान बनाते हैं ।अपने कर्म हीधूल चटाते हैं ।बाकी सारी बातेंसब बेकार हैं ।अपने कर्म हीबनाते-बिगाङते हैं ।बात-बात परभगवान को क्यों कोसें ?बाधाएँ आने परदूजों को क्यों दोष दें ?आदमी क्यों जीवन भरजोङ-तोङ बैठाता है ?जब अपना किया हीअपने खाते में जाता है ।
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