बुधवार, 15 अप्रैल 2026

कलावती


गोबर से लीप कर 

तैयार की गई भित्ती पर

खङिया और लाल मिट्टी से 

जीवन के प्रतीक चित्र 

उकेरती स्त्री सबसे अनूठी

कलाकार है ।


उसने जो देखा वही 

अपना लिया ।

जो जिया उसे ही

गोल, चौकोर,सीधी

और कभी घुमावदार 

रेखाओं में उतार दिया ।


रंग तो दो ही थे, उनसे ही

अद्भुत रचना कर दी ..

मिट्टी पर बनी आकृतियाँ

सजीव हो उठीं , गीत गाती

गुनगुनाती छवि से उसकी

मैत्री है चिरंजीवी ।

 

घर के काम-धाम निबटा कर, 

दोपहरी जब पसर जाती,

वो खूब बतियाती 

अपने रचे मोर, गौरैया, हंस,

खेत, दालान, कुँए की जगत,

नदी, तालाब, जामुन का पेङ,

कुटिया, बकरी, गाय, कुकुर,

जीवन के सारें संदर्भों को

उंगलियों के पोरों से महसूस करती

अपनी भित्ती पर चित्रित कर,

अनुभव के आङे-तिरछे खानों को

अपनी समझ के सौंधे रंगों से भर देती ..

उसकी कला है कालजयी ।


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                     छवि : अंतरजाल से साभार  

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! सुंदर रचना नूपुर जी, कितनी अनूठी कलाकार है वह स्त्री, जो अपने आप ही रच देती है आसपास जो भी देखा उसे और वह भी खड़िया और लाल मिट्टी से, यही लोक कला आधार बनती है ललित कलाओं का

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  2. वाह!!!
    अप्रतिम कलावती भी, और यह रचना भी जो कलावती की कला का शब्दचित्रण कर रही।

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 18 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  4. ...और,
    एक और कलावती है
    जो इन कलावतियो का
    अपनी कलाकारी से
    खुब सुंदर वर्णन कर
    इन्हे कलमबद्ध करती।

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