रविवार, 20 दिसंबर 2020

प्रफुल्ल फूल



टहनियों पे खिलते फूल ।
पूजा की टोकरी में रखे फूल ।
माला में पिरोए फूल ।
चित्रों में सजीव फूल ।
किताबों में संजोए फूल ।
गुलदस्तों से झांकते फूल ।
सेहरे की लङियों में फूल ।
वेणी में गुंथे गजरे के फूल ।
मन की टोह लेते फूल ।

मन की टोह लेते फूल ।
मर्म को छू लेते हैं फूल ।

ख़ैरियत का पैग़ाम
लाते हैं फूल ।
दुआओं भरा सलाम
पहुंचाते हैं फूल ।

तरह-तरह से बचा के
रखे जाते हैं अपने-अपने 
जिगरी .. मनपसंद फूल ।
दवा की मानिंद वक़्त पड़े 
काम आते हैं फूल ।
 
और फूलों की सुगंध ?
कैसे सहेजी जाती है ?

आप ही गुपचुप.. स्वतः
प्राणों में समा जाती है,
कल्पना में बिखर जाती है,
जीवन में घुल-मिल जाती है,
प्रफुल्लित फूलों की सुगंध ।

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

ढलते सूरज ने भी देखा

आज संध्या समय
जो बाला दिया, 
बहुत देर तक
जलता रहा ।

अकंपित लौ
तम के भाल पर 
तिलक समान
शोभायमान ।

लक्ष्य केवल साध्य 
पूर्णतः समर्पित 
ध्यानावस्थित लौ ।

जब-जब दीप बाला,
जगमगाता देखा 
अंतर के देवालय का
छोटा-सा आला ।