बुधवार, 13 जनवरी 2021
रविवार, 20 दिसंबर 2020
प्रफुल्ल फूल
टहनियों पे खिलते फूल ।
पूजा की टोकरी में रखे फूल ।
माला में पिरोए फूल ।
चित्रों में सजीव फूल ।
किताबों में संजोए फूल ।
गुलदस्तों से झांकते फूल ।
सेहरे की लङियों में फूल ।
वेणी में गुंथे गजरे के फूल ।
मन की टोह लेते फूल ।
मन की टोह लेते फूल ।
मर्म को छू लेते हैं फूल ।
ख़ैरियत का पैग़ाम
लाते हैं फूल ।
दुआओं भरा सलाम
पहुंचाते हैं फूल ।
तरह-तरह से बचा के
रखे जाते हैं अपने-अपने
जिगरी .. मनपसंद फूल ।
दवा की मानिंद वक़्त पड़े
काम आते हैं फूल ।
और फूलों की सुगंध ?
कैसे सहेजी जाती है ?
आप ही गुपचुप.. स्वतः
प्राणों में समा जाती है,
कल्पना में बिखर जाती है,
जीवन में घुल-मिल जाती है,
प्रफुल्लित फूलों की सुगंध ।
शनिवार, 5 दिसंबर 2020
ढलते सूरज ने भी देखा
आज संध्या समय
जो बाला दिया,
बहुत देर तक
जलता रहा ।
अकंपित लौ
तम के भाल पर
तिलक समान
शोभायमान ।
लक्ष्य केवल साध्य
पूर्णतः समर्पित
ध्यानावस्थित लौ ।
जब-जब दीप बाला,
जगमगाता देखा
अंतर के देवालय का
छोटा-सा आला ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
