सोमवार, 27 जनवरी 2020

चवन्नी मत भूलना




जब तुमने ठान ही लिया है,
अपना रास्ता चुन ही लिया है,
तो पहले पूरी तैयारी करना
उसके बाद ही घर से निकलना ।

रास्ता है भई यानी सबका है ।
देखो कुछ भी हो सकता है ।
हरदम आंख-कान खुले रखना ।
और ठोकर खाने से मत डरना ।

रास्ता है तो ठोकर भी लगेगी ।
बहुत दिनों तक दुखती रहेगी ।
पर डर से चलना मत छोड़ना ।
बस संभल के हर कदम रखना ।

रास्ता है खुला कड़ी धूप तो होगी ।
फेंटा सर पर बांध कर ही निकलना ।
राह में साथ पानी अवश्य रखना ।
और जेब में ज़रूर चवन्नी रखना ।

चवन्नी से आजकल क्या आता है !
बस हृदय अपना आश्वस्त होता है ।
नारायण जपने से ही क्या होता है ?
साधना को नाम का आधार होता है ।


बुधवार, 22 जनवरी 2020

Pondering Over A Rose


Pondering over a rose
A bird meditated on
The compelling beauty
Of a blooming life,
That actually survived
The thorns in its stride.

The rose stands poised and pretty
Smiling with innocent pride.
Its fragrance is a blessing
That awakens the soul.

Reminds me how a little bird
Understands the overcoming
Of the everyday survival test.
Dodging the dangers surrounding
Its little family in the little nest.

Looking at them I got this feeling
Life's beauty lies in its struggles.

रविवार, 19 जनवरी 2020

काग़ज़ की नाव


बारिश के पानी में 
छम-छम नाचते 
पानी के बुलबुले 
तैरते देख कर, 
जब कोई बच्चा 
दौड़ कर आता है, 
बड़े चाव से
काग़ज़ की नाव 
बना कर 
पानी में बहाता है,
और सांस रोके देखता है 
नाव डूबी तो नहीं !

देखते-देखते 
जब हिचकोले खाती, 
फिर संभलती, 
नाव बहने लगती है,
और बच्चा उछलता 
शोर मचाता, 
अपार ख़ुशी से 
ताली बजाता है  .  . 

बारिश की बूंद-सा 
वो मासूम लम्हा, 
उस बच्चे को 
ताउम्र, 
ज़िन्दगी के किसी भी 
भंवर में 
डूबने नहीं देता।