बुधवार, 11 सितंबर 2019

इच्छाशक्ति



मेघों से आच्छादित आकाश में 
जब अनायास खिलता है इंद्रधनुष
जल की बूंदों से छन कर आती
सूर्य रश्मि के प्रखर तेज को ही
कहते हैं इच्छाशक्ति ।


दुख से जकड़े घोर अंधकार में
जब सब हो जाता छिन्न-भिन्न
हारा मन होता टूक-टूक हो मूक
आस का दीप बने जीवट को ही
कहते हैं इच्छाशक्ति ।


दुर्घटना की असह्य विडंबना में
श्वास जब बूंद भर तन में रह जाए
तब झंझावत में डटी अडिग लौ सम
प्राण जगाने वाले मनोबल को ही
कहते हैं इच्छाशक्ति ।


बुधवार, 4 सितंबर 2019

वंदनवार



एक दिन अकस्मात
झर गए यदि सब पात 
ऐसा आये प्रचंड झंझावात.. 

ना जाने क्या होगा तब ?
सोच कर ह्रदय होता कम्पित।

सुखी टहनियों पर कौन गाता गीत ?
सूने ठूंठ पर कौन बनाता नीड़ ?
रीते वृक्ष का कोई क्यों हो मीत ?

क्या कभी हो पायेगा संभव ऐसा ?
ठूंठ की जड़ में जाग्रत हो चेतना।
प्राण का संचार हो शाखाओं में ऐसा
लौट आये बेरंग डालियों पर हरीतिमा।

कोई पंछी राह भूले पथिक सा 
संध्या समय आन बैठे विस्मित सा।  
अनायास ही छेड़ दे कोई राग ऐसा 
धूप और वर्षा की बूंदों के शगुन का। 
दृढ विश्वास के नव पल्लवों की हो ऐसी छटा 
पात-पात शोभित हो वन्दनवार सरीखा।