शनिवार, 14 अप्रैल 2012

लतीफ़ा


समझ में आया तो
दिल खोल कर हँसा.
आखिर लतीफ़ा क्या था
अपना ही किस्सा था
जीने का हिस्सा था ..
समझ लीजिये !

वाकया समझ कर सुन लो,
लतीफ़ा समझ कर हँस लो..
तो जीना आसान हो जाये,
खुश रहने का सबब बन जाये !




शनिवार, 7 अप्रैल 2012

खोकर पाना


जिस दिन मेरा प्यार
अपनी पहचान खो बैठा,

हारसिंगार के फूलों-सा
झर गया ..
मुट्ठी से रेत जैसा
फिसल गया ..
पारे की तरह
बिखर गया ..

उस दिन मैंने,
खोकर पाना सीखा.
खुश्बू की तरह
हवाओं में घुलमिल जाना,
फूलों में बस जाना सीखा.

अपना होकर,
सबको अपनाना सीखा.