कुछ और पन्ने

रविवार, 21 जून 2026

क्या तुमने सुना ?


जीवन का आलाप ही 

संगीत कहलाया होगा ।

जब नवजात शिशु का

रोना भी मधुर स्वरालाप

था माँ और पिता के लिए।

तब से ही हर ध्वनि में

संगीत सुना संभवत: 

मैंने और तुमने ..

चिङियों का चहचहाना

पत्तों की सरसराहट 

हवाओं का अस्फुट स्वर

बूँदों का छनकना 

जल का कल-कल बहना

बैलों के गले में घंटी का

रह-रह कर हिलना,

कोयल की कुहू-कुहू

चप्पू का चलना

सायरन का बजना

टाइपराइटर का टकटकाना

कीबोर्ड का सरपट दौङना

गली में सामान बेचते 

हरकारे का आवाज़ लगाना

लङकियों का खिलखिलाना

बच्चों का शोर मचाना

खुश होकर ताली बजाना,

बादलों का गरजना,

अपने साथी का गुनगुनाना..

नवरस की अभिव्यक्ति

भावनाओं की प्रतिध्वनि

प्रतीत हुए जब भी सुना ।

संगीत चतुर्दिक बिखरा हुआ।

कभी सुना, कभी किया अनसुना ।

जब कभी जीवन गान अधूरा लगा,

ह्रदय के स्पंदन में ध्रुवपद सुना ।

 

2 टिप्‍पणियां:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 25 जून, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह!! वाक़ई कण-कण में संगीत छिपा है, बस सुनना भर है

    जवाब देंहटाएं

कुछ अपने मन की भी कहिए