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गुरुवार, 19 मार्च 2026

मिलनसार किरायेदार गौरैया


ठुमक-ठुमक परकोटे पर

फुदक फुदक छज्जे पर

बेनागा रोज़ाना आती ।

चहचहा हर सुबह जगाती ।

छप-छप-छप जल से खेलती,

दाना चुग चुग खुशी मनाती ।

चोंच में तिनके सुतली,टहनी 

काग़ज़, पत्ते बटोर ले जाती,

घोंसला बना कर घर बसाती ।

सीधी-सादी सी मनभाती गौरैया 

मिलनसार किरायेदार बन जाती ।

कीट-कीटाणु सफ़ाचट करती,

आबोहवा स्वच्छ कर देती ।

यानी पेशगी किराया दे देती !

दिनचर्या से ऐसी जुङ जाती,

सुबह-साँझ उसके कहे आती ।

शुभ वेला का स्मरण कराती ।

आस की पाती मनमौजी गौरैया

घर में घर कितना सा बनाती ?

चहल-पहल से अपनी चिमणी

दिल में गहरे घर कर जाती ।

एक तथ्य है सर्व विदित सर्वत्र

आदमी की धङकन सम पर 

स्वत: ले आती जब-जब कोई 

गौरैया सी चिरैया चहचहाती ।


3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 21 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. वाह!! कितने सुंदर शब्दों में आपने एक गौरैया की कहानी सुनायी है, वाक़ई उसे फुदकते और गाते देखना हर किसी के लिये सुंदर अनुभव होता है

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