थोङी-बहुत सभी
समझते हैं हिन्दी,
भाषा में ढल जाती
कई लहजे अपनाती ।
हर भाषा की अपनी
पहचान है अनोखी ।
पर अलबेली हिन्दी
बनी सब की सहेली ।
बारहखङी वंदनवार सी,
चौवालीस मनकों की
वर्णमाला वनमाला सी,
राजभाषा भारत की ।
संरचना सहज भाषा की
अल्पना ग्यारह स्वरों की
और तैंतीस व्यञ्जनों की
देववाणी संस्कृत से जन्मी ।
कहलाई फिर भी हिन्दी
फारसी द्वारा नामित हुई।
अन्य भाषाओं से जुङी
शब्दावली समृद्ध हुई !
लिपि देवनागरी सिद्ध हुई
वैज्ञानिक कसौटी पे खरी,
जग को शब्दों से जोङती
सबसे सहज जुङी है हिन्दी ।
सहजता से अपनाती सभी को..
जवाब देंहटाएंऐसी सहज हिंदी..
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 11 जनवरी 2026 को लिंक की जाएगी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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