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शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

हरफ़नमौला हिन्दी

थोङी-बहुत सभी

समझते हैं हिन्दी,

भाषा में ढल जाती

कई लहजे अपनाती ।


हर भाषा की अपनी

पहचान है अनोखी ।

पर अलबेली हिन्दी

बनी सब की सहेली ।


बारहखङी वंदनवार सी,

चौवालीस मनकों की

वर्णमाला वनमाला सी,

राजभाषा भारत की ।


संरचना सहज भाषा की

अल्पना ग्यारह स्वरों की 

और तैंतीस व्यञ्जनों की

देववाणी संस्कृत से जन्मी ।


कहलाई फिर भी हिन्दी

फारसी द्वारा नामित हुई।

अन्य भाषाओं से जुङी

शब्दावली समृद्ध हुई !


लिपि देवनागरी सिद्ध हुई 

वैज्ञानिक कसौटी पे खरी,

जग को शब्दों से जोङती

सबसे सहज जुङी है हिन्दी ।





2 टिप्‍पणियां:

  1. सहजता से अपनाती सभी को..
    ऐसी सहज हिंदी..

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 11 जनवरी 2026 को लिंक की जाएगी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

    जवाब देंहटाएं

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