बचपन में कहती थी नानी
सरस्वती पूजा की कहानी
पीले वस्त्र पीले फूलों की,
पीले नैवेद्य की पीली थाली
पर देवी जिनकी पूजा होती
पहनें श्वेत रंग की ही साङी
सफ़ेद हँस की उनकी सवारी
पय समान और शुभ्र हिम सी
माँ शारदे की छवि उजियारी ..
खेतों में पीली सरसों जो फूली
हरी-भरी डाली पर फूल बेशुमार !
हो गई वसंत आगमन की मुनादी
बही बसंती पवन बाँध पग में नूपुर !
गेंदे की लङियों से सजावट सारी
धूप और पुष्पों की सुगंध सुवासित !
समस्त कला-कौशल की अधिष्ठात्री
माँ शारदा की वंदना करते पंक्तिबद्ध..
संगीत वाद्य वृंद ने झंकृत किए तार
मृदुल सुरों ने अर्पित की मधुर रागिनी
सुर स्तुति सुन मुसकाई वीणापाणि
माँ के नयन ज्यों गहरी नदिया में नैया
माँ की दृष्टि, सृष्टि तरणी की खेवैया ।
माँ की नासिका पर कौंधे हीरे की कनी
मुख से फूल झरे हरसिंगार से शब्दिता ।
कंठ में पहने देवनागरी की वर्णमाला
सुगंधित सतरंगी कुसुम कली मुक्ता मणि
कर में धारण कर कमल और जपमाला,
करकमल में कलम से लिखी स्नेह पाती
चित्रकला, नृत्य, नाट्य की वरद हस्तमुद्रा ।
अभिव्यक्ति सरल, सहज , सत्यनिष्ठ हो ।
विद्या से ज्ञान , विनय, विवेक जाग्रत हो ।
प्रकृति के विविध रुपहले चित्र अंकित हों ।
ह्रदय के स्पंदन में इंद्रधनुषी तरंग हो ।
मौन मुखर, वाणी ओजस्वी, मधुर बैन हों ।
कल्पना की अल्पना रचना मनमोहक हो ।
शब्द अलंकार ,भाव की शुभ प्रतिध्वनि हों ।
जीवन में रस उपजे ऐसा तुम सृजन करो ।
जङता का तम हरो, सुमति और संवेदना दो ।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 26 जनवरी 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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भक्तिभाव से पूर्ण सुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएंमाँ शारदे की भक्तिमय प्रार्थना
लाजवाब।
सरस्वती पूजन का विशेष भाव लिए सुन्दर रचना ...
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