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रविवार, 18 जनवरी 2026

मौन की भाषा



मौन एक भाषा है 

समस्त सृष्टि के मध्य

सहज संवाद की ।


सूर्योदय मौन ,

चंद्रोदय मौन ..

दिवस रात्रि मौन..

फूलों का खिलना मौन ।


शब्द मौन..संवेदना मौन ।

मन जुङने की पुलक मौन ।

मौन भीगे नयनों की भाषा ।

मौन ह्वदय की अभिलाषा ।


मौन रह कर सुना जाता है,

जो रह गया था अनसुना ।

मौन बुनता है शब्दलोक

मौन रचता है बूँद-बूँद संगीत ।


मौन करता है सृजन।

विवेचना जीवन की ।

मौन गढ़ता है स्मृति ।

मौन सुनाता है इतिहास ।

मौन लिखता है किताब ।

सोख लेता अश्रु का सैलाब ।


मौन बदलता है दृष्टिकोण।

देखने देता है दूसरा पक्ष ।

यज्ञ की समिधा है मौन ।

मौन गहरे पैठ पा जाता है मर्म।

मौन है गहरे कूप का जल ।

मन प्रांत कर देता शीतल ।

मौन का आकाश है स्वतंत्र।

मौन की व्याख्या है मौन ।


मौन आत्म विश्लेषण

दिखाता है दर्पण ..

मौन जगाता शक्ति,

दृढ़ करता मनोबल,

सुलझाता उलझे तार ।

बहुधा मौन बन कर खेवैया

किनारे लगा देता है नैया ।

 

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