शब्दों में बुने भाव भले लगते हैं ।
स्याही में घुले संकल्प बल देते हैं ।
कुछ और पन्ने
▼
गुरुवार, 20 मार्च 2025
मुन्नी की सहेली गौरैया
एक गौरैया आती है जब दोपहरी हो जाती है । घर में होते हैं जो लोग झपकियाँ लेते रहते हैं मुन्नी को नींद नहीं आती उसे ख़बर लग जाती है
दबे पाँव बाहर आकर वो इधर-उधर ताकती है । गमलों के पास जल पात्र में गौरैया नहा रही हैं !
परम प्रफुल्ल घुटनों के बल मुन्नी भी आ बैठी है तोतले बोलों से पुकार बजाती ताली बार-बार है !
आहट सुन मुन्नी की माँ जाग कर उसे बुलाती है पास न पाकर घबराकर बाहर खोजने भागती है । मुन्नी को गौरैया संग खेलता देख दंग रह जाती है ! आते देख उसे जो गौरैया फुर्र से उङ जाती है .. मुन्नी की ताली पर वही आज बेधङक फुदकती है ! फुदक-फुदक हथेली पर चहचहा कुछ कहती है
मुन्नी भी जाने क्या समझी बस हँसती ही जाती है ! मुन्नी की सहेली गौरैया अब घर में ही बस गई है !
सहज,सुंदर, भावपूर्ण बाल कविता। सादर। ---- जी नमस्ते, आपकी लिखी रचना शुक्रवार २१ मार्च २०२५ के लिए साझा की गयी है पांच लिंकों का आनंद पर... आप भी सादर आमंत्रित हैं। सादर धन्यवाद।
सुंदर
जवाब देंहटाएंसहज,सुंदर, भावपूर्ण बाल कविता।
जवाब देंहटाएंसादर।
----
जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २१ मार्च २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंगौरैया दिवस पर बहुत भावपूर्ण प्यारी रचना।
जवाब देंहटाएंमैने भी कभी "गौरैया और गुड़िया" नाम से एक कविता लिखी थी।
बहुत शुभकामनाएं दोस्त।