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बुधवार, 17 जून 2026

वो एक जोङी नयन


वो एक जोङी नयन
विशाल वर्तुलाकार 
उनका पावन सम्मोहन
पारदर्शी नदी का जल
शीतल हुआ ह्रदयतल
स्निग्ध चंदन का लेपन
वो एक जोङी नयन..

वो एक जोङी नयन
पट की ओट से गोपन
अपलक अवलोकन ।
दीपज्योति मध्यम, 
धूमिल होता अंतर ।
सर्वस्व हर लेते तत्क्षण
वो एक जोङी नयन ।

वो एक जोङी नयन
समाया जिनमें संसार
अथाह करुणा अपार ।
अश्रु जल बिंदु साकार
घुल गया मानो काजल
सुदर्शन विस्तार सजल
वो एक जोङी नयन ।

श्याम भ्रमर विद्यमान 
गुंजायमान नाद ओंकार ।
रथ चक्र की धुरी समान
पुतली तुम्हारी घनश्याम ।
डिठौना जगत आनन पर
दैदीप्यमान हे जगन्नाथ !
वो एक जोङी नयन ।



7 टिप्‍पणियां:

  1. कान्हा की करुणा का कोई अंत नहीं, भक्तिभाव से पूर्ण सुंदर रचना

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 18 जून, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. भक्तिरस से ओतप्रोत भाव पूर्ण सृजन ।
    डिठौना जगत आनन पर
    दैदीप्यमान हे जगन्नाथ !
    वो एक जोङी नयन ।
    अति सुन्दर 🙏

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  4. आहा! गोल नयनों में समायी गोल दुनिया, और सीधी सुंदर कविता! बहुत प्यारी।

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  5. पट की ओट से गोपन
    अपलक अवलोकन ।
    वाह!!!
    वो एक जोङी नयन अति मनमोहन
    बहुत ही सुन्दर भक्ति भावमय लाजवाब सृजन ।

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